ग़ज़ल । By Shivankit Tiwari "Shiva" ।

खुद  से  ज्यादा  उसकी  बातें  करता है,
इक लड़का जो इक लड़की पर मरता है,

अक्सर  दोनों  झगड़ा  करते  रहते है,
कहते  है  प्यार  झगड़े  से ही बढ़ता है,

हरदम  चुप  रहना  भी इक कमजोरी है,
हक़ की खातिर खुद ही लड़ना पड़ता है,

ख़ामोशी भी  मुझसे बाते करती  है,
उसको जब सूनेपन से डर लगता है,

इक फ़कीर को कम्बल देकर तो देखो,
जो सड़कों पर  ठिठुर  ठंड से मरता है,

मंजिल भी अक्सर उसको ही मिलती है,
जो सही राह पर चलता नहीं बदलता है,

-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"







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