"उसकी नजरें"- कविता - BY SHIVANKIT TIWARI "Shiva"
उसकी नजरें मुझसे मिली,
मैं अचानक से घबरा गया,
उसे देख-देख की देखता रह गया,
उसका जादू सा मुझपे समा गया,
मेरे दिल ने कहा ये अच्छी शुरुआत है,
नजरों से नजरों की ये पहली मुलाकात हैं,
उसकी नजर का असर इस तरह से मुझपे हो गया,
मैं उसे देखता ही रहा और एहसास-ए-जादू सा हो गया,
नजरे मिली नजर से उसकी नजरिया सा हो गया,
वो भी मुझे नजरों से देखती रह गई और शुरू प्यार का जरिया सा हो गया,
-शिवांकित तिवारी "शिवा"
युवा कवि एवं लेखक
दिनांक-19-05-2018
मैं अचानक से घबरा गया,
उसे देख-देख की देखता रह गया,
उसका जादू सा मुझपे समा गया,
मेरे दिल ने कहा ये अच्छी शुरुआत है,
नजरों से नजरों की ये पहली मुलाकात हैं,
उसकी नजर का असर इस तरह से मुझपे हो गया,
मैं उसे देखता ही रहा और एहसास-ए-जादू सा हो गया,
नजरे मिली नजर से उसकी नजरिया सा हो गया,
वो भी मुझे नजरों से देखती रह गई और शुरू प्यार का जरिया सा हो गया,
-शिवांकित तिवारी "शिवा"
युवा कवि एवं लेखक
दिनांक-19-05-2018

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