कुछ अल्फाज - कुछ खयालात । By Shivankit Tiwari "SHIVA"
#जज़्बात ~ ज़िन्दगी ~ जिंदाबाद
बर्बादियों पर अब भी मलाल नहीं हैं,
बर्बादियों पर अब भी मलाल नहीं हैं,
वो गुनाहगार गलत होके भी सही है,
जज़्बात जख्मी है ज़िन्दगी सहमी हुई है,
हमसफ़र अब संग नहीं गहमागहमी हुई है,
आंसू अब निकलते नहीं फ़िर भी आंखों में नमी हैं,
आसमां मेरा रूठा हैं मुझसे क्योंकि संग मेरे जमीं हैं,
ख़ैर! खेल है ज़िंदगानी सबकी अलग कहानी और किरदार हैं यहां,
कभी पास तो कभी फेल है जिंदगानी वक़्त के सभी शिकार हैं यहां,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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डर से डरने वाले जीते है जीवनभर डर-डर कर,
खुलकर जीने वाले शान से मरते है एकदिन खुलकर,
अक्सर प्यार मोहब्बत में एक दिन दूरी हो जाती हैं,
फिर दोनों की पक्की यारी में इक दूरी हो जाती हैं,
जीवन ने है बहुत सिखाया सारे पाठों को रट वाया,
अनुभव सारे मुझको प्यारे जीवन का मकसद समझाया,
जीवन मंत्र यही सीखा हैं सबसे अलग बनो और जियों,
हार जीत से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य का शिखर छुओ,
सबके साथ चलों,
सबको लेकर चलों,
~©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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अपना होता है अपना जब मतलब उसका होता है,
वरना अपना केवल कहने को ही अपना होता है,
नींदें ख्वाबों के चक्कर में जगती रहती रात रात भर,
मंज़िल लक्ष्य और हम तीनों होते रहते नीचे उपर,
दोस्त दोस्ती जैसे रिश्ते जीने का मौका देते है,
कुछ है दोस्त नाम के केवल मौके पर धोखा देते है,
मुश्किल हैं तय करना दूरी जो थे पहले मेरे साथ,
लेकिन,
अब उन्हें दूर से ही राम राम जोड़ के दोनों हाथ,
~©®Shivankit Tiwari
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वक़्त बदलता है किस्मत पर हम तो वक़्त बदलते हैं,
जो है नहीं हमारे संग हम संग उसी के चलते हैं,
-©®Shivankit Tiwari
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जो करता है जैसा काम वैसा नाम पाता है।
मैं उसके काम आता हूं जो मेरे काम आता है।
-©®शिवांकित तिवारी "शिवा"
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ये धर्म, जाति का भेदभाव बस जिंदा रहने तक है,
मौत बिना मजहब के सबको गले लगाती है,
राजा हो या रंक ना कोई इसे रोक पाया है कभी,
मौत एक बस सच है इकदिन सबको आती है,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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दवा, ज़ख़्म, मरीज और हकीम हूं मैं,
सही वक़्त पर सभी किरदार निभाता हूं,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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यदि तुझे तेरे होने का गुरूर है,
तो मुझे तुझे खोने का गुरूर है,
तू आसमां हैं तुझमें कोई कमी नहीं,
मगर मुझे मेरे जमीं होने का गुरूर है,
~©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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जीवन के रंगमंच का अदना सा कलाकार हूं,
इक मशहूर कहानी का गुमनाम सा किरदार हूं,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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तिनके - तिनके जैसे गिनके इक - इक अक्षर को है पूजा,
कवि के खातिर "कविता" के सम नहीं जरूरी कोई दूजा,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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जिसके आंचल में पल, पढ़ लिखकर तैयार हुआ,
उसको घर से निकाल वृद्धाश्रम में छोड़ आया है,
लानत है ऐसे बेटे के होने पर जो पत्नी के कारण,
मां - बेटे के पाक रिश्ते को निर्ममता से तोड़ आया है,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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ज़िन्दगी भी मौत से अब लड़ रही है,
इस क़दर सबकी कहानी बढ़ रही है,
हिज्र के भी बाद करती है मोहब्बत,
रोज़ ख़त मेरे अभी भी पढ़ रही है,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
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ना कभी टायर्ड ना कभी रिटायर्ड होता है,
मानव सेवा में तत्पर सदैव डॉक्टर होता है,
-©® शिवांकित तिवारी "शिवा"
अपराजेय, अडिग, अनुशासित बाहर से अंदर से सॉफ्टर होता है,
अनवरत,अथक मेहनत करता, ना कभी टायर्ड ना रिटायर्ड डॉक्टर होता है,

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